हाल ही में एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत आने वाले समय में रूस से कच्चे तेल का आयात जारी रखेगा। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर वह सत्ता में लौटते हैं तो रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर सख्त पाबंदियां लगा सकते हैं।
फिलहाल रूस भारत को उसके कुल कच्चे तेल आयात का करीब 35% सप्लाई कर रहा है। यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाए, लेकिन भारत ने अपने ऊर्जा हितों को प्राथमिकता दी और रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और रूस भारत को भारी छूट पर तेल दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह फैसला पूरी तरह से ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। भारत सरकार ने साफ कहा है कि वह अपनी जनता के हितों को देखते हुए दीर्घकालिक समझौते बनाए रखेगी, ताकि घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें काबू में रहें।
हालांकि पश्चिमी देशों का मानना है कि रूस से तेल आयात जारी रहने से उसकी अर्थव्यवस्था को सहारा मिलता रहेगा, जिससे यूक्रेन युद्ध को आर्थिक मदद मिल सकती है। इस पर भारत का तर्क है कि ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना हर देश का अधिकार है और भारत को सस्ते विकल्प चुनने का पूरा हक है।
कई विश्लेषक यह भी मानते हैं कि आने वाले सालों में भारत रूस के साथ ऊर्जा क्षेत्र में अपने संबंध और मज़बूत कर सकता है। इससे भारत को न केवल स्थिर सप्लाई मिलेगी बल्कि वह अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के उतार-चढ़ाव से भी काफी हद तक सुरक्षित रह सकेगा।

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