ट्रंप की नई टैरिफ नीति से वैश्विक व्यापार में भूचाल | August 2025

अमेरिका का व्यापारिक हमला: ट्रंप की नई टैरिफ नीति से वैश्विक बाजारों में हलचल,

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति

डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से विश्व अर्थव्यवस्था हिल गई है — भारत, कनाडा, स्विट्ज़रलैंड जैसे देश सबसे अधिक प्रभावित।

क्या है पूरा मामला?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 1 अगस्त 2025 को एक ऐतिहासिक और विवादास्पद फैसला लेते हुए 66 देशों से होने वाले आयात पर नया टैरिफ लागू कर दिया।

इस फैसले के तहत:

भारत पर 25% टैरिफ

कनाडा पर 35%

स्विट्ज़रलैंड पर 39%

ताइवान, दक्षिण अफ्रीका समेत अन्य देशों पर भी कड़े शुल्क लगाए गए हैं।

ट्रंप का दावा है कि यह कदम “अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों की रक्षा” के लिए है।

कैसे बदला वैश्विक बाज़ार का मूड?

टैरिफ लागू होने की घोषणा के बाद वॉल स्ट्रीट और एशियाई बाज़ारों में भारी गिरावट दर्ज की गई।

निवेशकों का भरोसा डगमगाया, डॉलर की कीमत में उतार-चढ़ाव देखा गया।

एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट आधारित कंपनियों के शेयरों में 5–12% तक की गिरावट।

भारत पर असर कितना गहरा?

भारत अमेरिका को कई प्रमुख वस्तुएँ निर्यात करता है:

ऑटो पार्ट्स

फार्मास्युटिकल्स

इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्सटाइल

25% टैरिफ के कारण इन क्षेत्रों में लागत बढ़ेगी, ऑर्डर घट सकते हैं, जिससे MSMEs और एक्सपोर्टर्स पर असर पड़ेगा।

वाणिज्य मंत्रालय ने इस पर आपत्ति जताते हुए डब्ल्यूटीओ (WTO) में अपील की तैयारी शुरू कर दी है।


स्विट्ज़रलैंड ने दी तीखी प्रतिक्रिया

स्विस सरकार ने ट्रंप के फैसले को "एकतरफा और अकारण" बताया।

39% टैरिफ को लेकर कहा गया कि यह उनके न्यायपूर्ण और पारदर्शी व्यापारिक संबंधों का अपमान है।

अमेरिका की अंदरूनी हालत भी चिंता में

जुलाई 2025 में केवल 73,000 नई नौकरियां जुड़ीं।

पूर्व महीनों के आंकड़े भी -2.5 लाख नौकरियों तक संशोधित किए गए।

इस डेटा के खुलासे के बाद ट्रंप ने लेबर ब्यूरो की प्रमुख, एरिका मैकएंटारफर को हटा दिया, जिससे संस्थागत स्वतंत्रता पर सवाल उठ रहे हैं।

भविष्य की आशंका: क्या होगा आगे?

व्यापार युद्ध बढ़ सकता है

डॉलर और तेल की कीमतों में अस्थिरता

भारत सहित एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर दबाव

नई रणनीतिक साझेदारियाँ की आवश्यकता

ट्रंप की यह टैरिफ नीति न केवल अमेरिका की वैश्विक साख को चुनौती देती है, बल्कि वैश्विक व्यापार को एक नई व्यापारिक जंग की ओर भी धकेल सकती है। भारत सहित तमाम देशों को अब अपनी आर्थिक और कूटनीतिक रणनीति में तेज़ी से बदलाव करने होंगे।

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